Wednesday, 4 December 2013

Hindi Shayari

दिलों की उकदा-कुशाई वक्त है के नहीं य...


दिलों की उकदा-कुशाई वक्त है के नहीं ये आदमी की ख़ुदाई का वक्त है के नहीं कहो सितारा-शनासो फलक का हाल कहो रुखों से पर्दा-कुशाई का वक्त है के नहीं हवा की नर्म-रवी से जवाँ हुआ है कोई
फरेब-ए-तंग-कबाई का वक्त है के नहीं खलल-पजीर हुआ रब्त-ए-मेहर-ओ-माह में वक्त बता ये तुझ से जुदाई का वक्त है के नहीं
अलग सियासत-ए-दर-बाँ से दिल में है इक बात ये वक्त मेरी रसाई का वक्त है के नहीं दिलों को मरकज-ए-असरार कर गई जो निगह
उसी निगह की गदाई का वक्त है के नहीं
'अजीज' ामिद मदनी
Get more Hindi shayari at jagran.com

No comments:

Post a Comment